• २०८३ जेष्ठ १२, मंगलवार

सावन पर भी यौवन

कहाँ समझ पाए हो तुम

बस यही दोष रहा

दोस्ती

प्रेम ही प्रेम है-

कौन पुछेगा ?

पर्दे के मगरूर !!

क्या मिलेगा ?