• २०८३ भाद्र १०, बुधबार

बहनों की शुभकामना

सावन पर भी यौवन

कहाँ समझ पाए हो तुम

बस यही दोष रहा

दोस्ती

प्रेम ही प्रेम है-

कौन पुछेगा ?

पर्दे के मगरूर !!