• २०८३ श्रावण ९, शनिबार

मैं बागी हो गई हूँ

नए सपने बुनें

माँ हूँ जन्म से मैं

नारियल की देह

आँख भर देखा कहाँ

खबर

कल आज और कल

कुछ सुख बचे हैं