• २०८१ असार ११ सोमबार

कैसे रचा है

बसन्त चौधरी

बसन्त चौधरी

किस लोक के स्रष्टा ने
की है यह अद्वितीय सृजना
किसने और क्यों रचा है
तुम्हारा अद्भुत रूप अनुपम

कन्दराओं के किसी एकान्त में
कौन था वो गुणी शिल्पी
जिसकी कल्पनाओं की
तूलिका से निकल कर
निखरा यह स्वरूप मनोरम

कौन था वह कला पारखी
जिसने संगमरमरी काया देकर
प्राणों का संचार कर दिया
और रख दिया प्यार से भरा
एक अनोखा हृदय अप्रतिम

कितना सुख पाया होगा
उस भट्टी ने तुम्हें तपाकर
और सौंप दिया क्शल हाथों में
उसकी कला का ही प्रतिफल है
तुम्हारा ये सौन्दर्य विहंगम

रूप लावण्य की चकाचौंध से
विचलित हुआ होगा अवनि नभ
देख कर स्वयं अपनी सृजना को
विस्मृत हो गया होगा प्रतिभव
देख तुम्हारा यह सौन्दर्य निरूपम ।

साभार: अनेक पल और मैं (कविता संग्रह)


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(चौधरी विशिष्ट साहित्यकार हैं ।)