माँ - Aksharang
  • २०७९ श्रावाण २९ आइतबार

माँ

सुषमा दीक्षित शुक्ला

सुषमा दीक्षित शुक्ला

चंदन जैसी माँ तेरी ममता,
तेरी मिसाल कहां दूं माँ ।
जनम मिले गर फिर धरती पर,
तेरा ही लाल बनूंगा माँ ।

तूने कितनी रातें वारी,
जाग जाग कर मुझे सुलाया ।
अपने नैनों की ज्योति से,
तूने मुझको जग दिखलाया ।

कैसे चुकाऊँ कर्ज़ दूध का,
कितना मलाल करूंगा माँ,
तेरी मिसाल कहाँ दूं माँ,
जनम मिले गर ।

चल कर खुद तपती राहों में,
तूने मुझको गोद उठाया ।
नज़र लगे ना कभी किसी की
काला टीका सदा लगाया ।

मेर जीवन का तू हिसाब थी,
किससे सवाल करूंगा माँ ।
तेरी मिसाल कहाँ दूं माँ,
जनम मिले गर ।

जीवन पथ से काँटे चुनकर,
तूने सुंदर फूल सजाया ।
मां ना कभी कुमाता होती,
औलादों ने भले रुलाया ।

धरती नदिया पर्वत अम्बर,
तेरी मिसाल कहाँ दूं माँ,
जनम मिले गर ।

तेरे पावन अमर प्यार को,
मैं नादां था समझ न पाया ।
ईश्वर भी ना तुझसे बड़ा है,
अब यह मेरी समझ में आया।

आंचल में फिर मुझे छुपा ले,
तेरा ख्याल रखूंगा माँ ।
तेरी मिसाल कहां दूं माँ,
जनम मिले गर ।


सुषमा दीक्षित शुक्ला
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