• २०८१ असार ३२ सोमबार

एक स्त्री

डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा

डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा

मैं स्त्री हूँ न,
सब कुछ सम्भाल लेती हूँ ।
आँगन की रंगोली हो..
या दफ्तर की फाइलें.,
या संविधान..
और या हो नेता नगरी,
या कोई भी कैसा भी काम,
कभी समाज सेविका बन..
या परिवार की चिंता हो..
या बॉस की डाँट.,
सब साडी के पल्लू के ठोक से
बड़े आसानी से मैं बाँध लेती हूँ ।
स्त्री हूँ न, सब संभाल लेती हूँ !!

नौकरी में भी…
शिक्षक बनकर सबको ज्ञान देती हूं ।
ऑफिस में सेक्रेटरी हूँ..
जमीन से आसमान तक..
सबकुछ सम्भल लेती हूं…
रेल हो या हवाई जहाज..
बस, ट्रक हो या मोटरकार…
बाइक हो या बाइसकिल,
सबकुछ बड़े आराम से चला लेती हूँ ।
स्त्री हूँ न, सब संभाल लेती हूँ !!

घर में भी न,
सब के नाज, नखरे..
ननद का राज़ हो,
या देवर की शरारतें..
बच्चों की अठखेलियाँ,
और दादी माँ के नुस्खे.,
पति की तीमारदारी,
सास ससुर की देखभाल..
ऑफिस में दोस्तों संग
खूब धूम मचा लेती हूँ ।
स्त्री हूँ न, सब सम्भाल लेती हूँ !!

सखी की शादी..
ड्रेस डिज़ाइन या हेयर स्टाइल.,
पल में सबकुछ संवार देती हूँ.!
बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट..
हर किसी के मनपसंद की डिस..
और खाने का स्वाद.,
चुटकियों में भाग दौड़ के..
सब काम बना लेती हूँ.,
मुझे यूँ ही न समझना,
मैं किसी से, किसी काम मैं कम नही हूँ ।
स्त्री हूँ न, सब सम्भाल लेती हूँ !!

खुश होती हूँ, तो..
बड़े ही गर्व से झूमती हूँ..
अपनों की ख्वाहिशों में
दुनिया सजा लेती हूँ.,
जब कोई नाराज करता है…
और सर से जब पानी उतर जाता है न
तो माँ दुर्गा, काली बन जाती हूँ..
नही मानती मैं तब किसी की
अपने हक, अधिकार के लिए..
दुश्मन से लोहा ले लेती हूँ,
हाँ हर कदम पर मैं
सब सम्भाल लेती हूँ ।
स्त्री हूँ न, सब संभाल लेती हूँ !!

प्रेम भी न मैं,
प्रेमी की प्रेमिका बन,
कालेज में दोस्त बनकर..
पति की धर्मपत्नी बनकर
बच्चों की माँ बनकर…
भाई की बहन बनकर,
सास ससुर की बहू बनकर…
घर की कुलवंतिनी बन
सारे के सारे रिश्तों नातो में…
असीम प्यार जीभर कर सबको देती हूं ।
स्त्री हूँ न, सब संभाल लेती हूँ !!

जब अपनो से ही,
अवसाद मिलता है..
तो मैं स्वयं टूटती हूँ..
बिखरती हूँ.,
कमज़ोर पड़ जाती हूँ..
अपने आप को कोसती हूँ
घुटती हूँ, टूटती हूँ, ग़लती हूँ
तो लगता है, कि…
काश ! कोई मुझे भी संभाल ले..!
इस ख़्याल से नम पलकों को..
तकिए से बाँट फिर मुस्कुरा लेती हूँ !
स्त्री हूँ न, सब संभाल लेती हूँ !!


(आगरा, भारत निवासी शर्मा शिक्षाविद, साहित्यकार, पत्रकार, कवि, लेखक समाजसेवी एवं मोटिवेटर हैं ।)
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