• २०८१ श्रावाण १ मङ्गलबार

फरेब हैं आँखें

अदिति शर्मा

अदिति शर्मा

तस्वीरें कभी न बदलें
जब वक़्त बदले दीवारें
चले जाने के बहुत क़रीब आकर ठहर जाना
जब भी बहे वक़्त
टूटकर न गिरे काँच
फरेब हैं आँखें
ज़हर हँसी
भँवर एक उँगली
वह उँगली तुम
ज़बान पलटकर हलक़ में
थूकती खून रोज़
बाहर आते शब्द झूठे
वह झूठ मैं
प्यार कहने से पहले रुकती हुई साँस ।


अदिति शर्मा
उत्तर प्रदेश, भारत