• २०८१ असार १२ मङ्गलबार

सच्ची श्राद्ध

सुषमा दीक्षित शुक्ला

सुषमा दीक्षित शुक्ला

प्रिय पूर्वज हमसे दूर हुए,
श्रद्धांजलि उन्हें समर्पित है ।

वे ईशधाम में जा बैठे ,
भावांजलि उनको अर्पित है ।

प्रभु उनको ना कोई कष्ट मिले,
मिल जाए मुक्ति उन पुरखों को ।

जिनकी पावन स्मृतियों से,
मनभारी है पर गर्वित है ।

आओ श्रद्धांजलि भेंट करें,
सब प्यारे पुरखों को अपने ।

उनकी स्मृतियों को हृदय लगा,
अब पूर्ण करें उनके सपने ।

शुचि नेह मिलेगा पितरों का,
जिनसे जन्मों के नाते हैं ।

करते हैं तर्पण तारण हित,
प्रभु जिनको बुला लिया तुमने ।

यदि जीते सेवा किया नहीं,
बस मरने पर श्राद्ध मनाते हैं ।

ऐसी संताने हैं कुल कलंक,
मृत पुरखों को बहलाते हैं ।

यदि देनी सच्ची श्रद्धांजलि,
है प्यारे पुरखों को अपने ।

पुरखों के सपने पूर्ण करो
वे अच्छी राह दिखाते हैं ।

यह वन्दन है अभिनंदन है,
यह ही पुरखों का है तर्पण ।

उनकी स्मृतियों को हृदय लगा,
श्रद्धा के सुमन करो अर्पण ।

तब पूर्वज भी होंगे प्रसन्न,
पा सच्चे प्रेम समर्पण को ।

जो देते थे आशीष हमें
वो मरकर भी प्रेम निभाते हैं ।


सुषमा दिक्षित शुक्ला, लखनऊ