• २०८१ असार १२ मङ्गलबार

तुम और फूल

ऋषभ देव घिमिरे

ऋषभ देव घिमिरे

फुलो के सामने
छुपाना चाह्ते भि छुप नहि सकति
तुम्हारे चेहरे कि रङ्ग
एक हि जैसी है दोनो कि बदन

फुलकी पलक और तुम्हारी झलक
दोनो एहसास देते है
भर लेते है
मनमे प्रसुन भाव

कोहि सापेक्ष नहि
निरपेक्ष है फुलो कि महिमा
क्यु कोइ अस्विकार करे
तुम और फुलोकी शालिनता
कोइ भि अभियोग करे क्यु
जब दर्द नहि देति है फुल
समाए हुए है तुम मे और फुलो मे अनन्त सम्बेदनाओ धार

तुम और फुल
फुल और तुम
मुझे एक जैसी लगती है
इस्लिए मै फुलो कि कोमलधारो कि तरह
तुनसे प्यार करता हु
स्विकार करो सचको
एक दुसरे कि प्रेम प्रवाह को ।


ऋषभ देव घिमिरे
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