भरदुतिया के नोत - Aksharang
  • २०७९ श्रावाण २९ आइतबार

भरदुतिया के नोत

कंचना झा

कंचना झा

पुसक अन्हरिया राति जाड़ अप्पन चरममे अछि । मुदा निन किनको आँखिमे नहि अछि आ भरि अंगनाके दाई काकी सब लागल छथिन । प्रसव वेदना सँ बेचैन आ अहुछिया काटैत आशाके आवाज जहन साउस लक्ष्मीके कानमे पड़ैत अछि तऽ हुनक हदृय छलनी छलनी भऽ रहल अछि ।
अहिबेर की हेतै बेटा आ की बेटिये ? मोनमे याह गुनधुन गुनधुन चलि रहल अछि । घरमे अन्नक दाना नहीं अछि । फेर एकबेर जीवनक माए सँ चाउर आ कि चुरा मांगै पड़त । कोना जिंनगी बसर होयत नहि जानि । भगवती अहिबेर सहाय होउ । अहिबेर कहुना पोताक मुँह देखायब । तहन तऽ जीवने माए क्यिाक ? आशा माए, किरण माए सँ कनियो कनियो कैचा कौड़ी लऽ लेब आ हे सभके मिठाई बाँटब ।
हे काली मईया अहिबेर पोताक मुँह देखा देब । पूजा में बताशा आ लड्डु चढ़ायब । लक्ष्मी अहि आशमे बैसल छथि जे कहुना भगवती हुनक मान राखैथ ।
इम्हर आशाके भरोस नहि अछि प्रसव वेदना सँ कोन खन छुटकारा भेंटत । डिहबार वाली माथ सहला रहल अछि आ जोर देवाक लेल कहैत अछि आशा सँ –
हे बहुरिया हे कनिये जोर आरों लगाबह , कनिकाल आर बर्दाश्त करै पड़त । आशा दांत पर दांत चढ़ौने अछि आ भरि आँखि नोर भरल प्रसव पीड़ाके सहैत छटपट छटपट कऽ रहल अछि ।
आशा डिहबारवालीके कहैत अछि–डिहबारवाली कि हेतै ? बेटा आ कि बेटी ।
डिहबारवाली कहैत अछि हे बहुरिया हमर मोन कहैत अछि एमकि भगवती बेटे देथिन । कैला चिंता करैत छी ?
अंगना के काकी दाई सभ आशा सँ बहुत प्रेम करथि छथि । ताहि सँ सभकियो गोहार लगा लगा रहल छथिन । सभके मोनमे एकहिटा बात हे अहिबेर पोताके दर्शन होमय देबै दुर्गा मईया ।
हे अहि घरके दिन बदलि जायत ज बेटा हेतै । कहुँ न बेटा बिना वंश कोना चलत ? नाम के लेत अहि वैद्य परिवारके ? छोटकी काकी बजलिह ।
गे दाई– ये काकी एना किया बजै छथिन यै ? सतलखा वाली बजलीह
ऊँ तऽ हम कोना खराप कहलहुँ–खालिबेटी तऽ अछि परिवारमे । कहुँ तऽ एतेक बड़का ई परिवार, नाम प्रतिष्ठा अछि परिवारके । दस गाँमके लोक चिन्हैत अछि अहि परिवारके । की अहिना । आरे बेटा हेतै । नाम करतै । बेटी की करतै ? वियाहदान हेतै अप्पन सासुरके मान सम्मान बढ़ेतै ।
हे यै काकी आब नहि बड अंतर होयत अछि बेटा आ बेटीमे भागलपुरवाली बाजल मुदा लक्ष्मी दोसरे दुनियामे छलिह । आशाके चित्कार मोनमे डर भय आनि देने छल जे अहियोबेर जँ बेटा नहि भेल तऽ कि होयत ? बेटाके आशमे चारिम संतान छी । अहि आशमे जे आबो बेटाके मुँह देखब आशाके सेहो हाल बेहाल अछि ।
ओना घरक अवस्था तऽ नहिये निक अछि तथापि फेर जँ बेटी होयत तऽ सबके अलाहना सुनय पड़त, जाबे घरमे नैत नहि होयत बाबूजी सिद्ध अन्न नहि ग्रहण करताह । हे छठि मईया डाला सुप देब, मधुर अहाँके चढ़ाय, होइयो ने सहाय । छठि मईया अहिबेर दऽ दियोक आशाके बेटा ।
दिन सुदिन भऽ जायत । ओना तऽ लक्ष्मी अपना पोती सभपर जान निछावर करैत छथि मुदा पोता तऽ पोता होयत अछि ।
मुदा लिखलाहाके मेटत ? बच्चाके कानयके आवाज सँ लक्ष्मी बुझी गेलिह जे घरमे चारिम लक्ष्मी आबि गेलिह । ओ धैरज ध लेलिह ।
बड़अनुराग सँ पोतीके देखलिह आ आशाके माथ सहलाबैत कहलिह
देखुँ लक्ष्मी घर अयलिह । आशा बहुत दुखित भेलिह कि ताबैतमे जेठकी बच्चियां आबि गेल आ बौआ देखबक कहै लागल ? आशा जम्मोटी बच्चियाके देखा देलक, बच्चियाके देख जेठकी बच्चियां नोरे झोरे कानय लागल आ आशा दिस देख कहै लागल जे जो तोरा फेर बेटिये भऽ गेलहुँ आब हम भरदुतियामे नोत ककरा सँ लेब ? ई कहि ओ खुब कानल आ ताहि संगे अंगना भरिके लोकक आँखि सँ नोर बहै लागल ।
सभके अप्पन अप्पन वेदना अप्पन पीड़ा छल, अप्पन अभिलाषा छल । लक्ष्मी एकबेर फेर जीवन माएके आंगन सँ चुरा आ कि चाउर आन्तिह, जेठकी बच्चियां भरदुतियाके लेल भाई बौआके इंतजार करतीह, आ आशाके चेहरा पर चिंताके एकटा अलगे लकीर खिंचा गेल जे फेर एकबेर प्रसव वेदना, प्रसव पीड़ाके सहै पड़त ?


कंचना झा, (उप प्राध्यापक एवम् रेडियोकर्मी)
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