• २०७९ असोज १८ मङ्गलबार

होरी

अनीता शाह

अनीता शाह

पर्व होरी कमाल हलचल बा,
चेहरा पर अबीर के छल बा ।

लोग आवें नजिक शहद बनके,
दोस्ती में कटार लागल बा ।

ठेस लगते सँभार ल$ खुद के,
लोग दुख से तमाम घायल बा ।

आँख के नीन रूप ले गइलख,
रूप सूनर हिज़ाब चंचल बा ।

छूट जाला जहान के दौलत,
लोभ लालच खराब जंगल बा ।

भेद सभि खोल दी मुहब्बत के,
गोड़ के ई घताह छागल बा ।


(शिक्षिका । नेपाली हिन्दी भोजपुरी में लेखन वीरगंज)
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