• २०७९ असोज २० बिहीबार

निकलेगा उम्मीद का सूरज

डॉ श्रीगोपाल नारसन

डॉ श्रीगोपाल नारसन

जो कभी नही देखा था
वह सब देखना पड़ा
इस २०२० के साल में
कोरोना को झेलना पड़ा
जीवन भारी सा हो गया
कई अपनो को ले गया

सबके सब अछूत हुए
हाथ मिलाना पाप हुआ
गले लगाना अभिशाप हुआ
चेहरा मास्क में ढक गया
पहचानना मुश्किल हो गया
मेले सब इतिहास हो गए

शादियां सादगी में बदल गई
शाना–ओ–शोकत ढ़ल गई
घरों में रहने को विवश हुए
ला‘क डाउन से आहत हुए
रोजी–रोटी सब चली गई
जिंदगी जैसे छली गई

कमाने का ज़रिया नही
वक्त रहा बढि़या नही
कोरोना हमे डराता रहा
अपनो से दूर करता रहा
सावधानी ही बचाव रही
सेनेटाइजर ही छाई रही

बीस सेकंड हाथ धौना
दो गज की दूरी बनाना
यही सब हम करते रहे
नौ माह तक चलते रहे
किसान भाई नाराज़ रहे
सड़को पर ही पड़े रहे
न्याय उन्हें मिला नही
कानून वापस हुआ नही
संघर्ष में वक्त बदल गया
२०२० से २०२१ आ गया

इस साल में यह सब न हो
यही संकल्प लेना होगा
उम्मीद का सूरज आएगा
दुःख सारे हर ले जाएगा
खुशियों की बरसात होगी
सबसे दिल की बात होगी
सब अच्छा ही होता रहे
यही शुभकामनाएं है
२०२१ की मंगलकामनाएं है ।


(रुड़की, उत्तराखंड, भारत)
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