हमर मिथिला धाम - Aksharang
  • २०७८ कातिर्क १० बुधबार

हमर मिथिला धाम

नगीना कुमारी झा

नगीना कुमारी झा

दहि, चुरा, पान, माछ आ मखान जतक पहचान,
सिर पS मुकुट रुपी पाग थिक ओतक शान ।।

जनक, बुद्ध आ सीता जतक आदर्श,
ओ इतिहासक धरोहर थिक मिथिला धाम ।।

ज्ञान(बिज्ञान जतक माटिक कण- कण मे बिराजमान,
प्रेम, मित्रता, सदभाव, मर्यादा जतक जन- जन के संस्कार ।।

जतक माटी के नमन करे ब्रम्हा, बिष्णु, महेश,
ओ पवित्र महान भुमी थिक मिथिला धाम ।।

अष्टाबक्र, गार्गी, एकबालक्य, नारद जतक सभा के शोभा,
ओ विद्वत्त कS जन्म- कर्म- भूमि थिक मिथिला धाम ।।

नित शास्त्रार्थ आ ज्ञानोपदेश सS गुन्जे धर्ती- गगन,
ओ महान सनातन वेद भूमी थिक मिथिला धाम ।।

जतक राग- रस देख मनमोहित होय देवी- देवता,
ओ विद्यापती कS भूमी थिक मिथिला धाम ।।

पाबनि, धर्म- कर्म, नित्य(संस्कार कS उर्वर भूमि,
ओ वेद- पुराण कS सम्वर्धक थिक मिथिला धाम ।।

जकर अपन अलग भाषा, लिपि, वर्ण- विन्यास आदि- इत्यादि,
अछि अपन संस्कार, संस्कृति, परम्पारा ओ थिक मिथिला धाम ।।

जतS लोक- रीति, गीत- नाद सS हर मास होय मधुमास,
ओ समृद्ध संस्कृति के धनवान थिक मिथिला धाम ।।

जतS धीया पुजबथि लक्ष्मी समान, जमाय बिष्णु भगवान,
जतक मान्यता थिक नर- नारी समान, ओ थिक मिथिला धाम ।।

उत्तर हिमालय गगन- चुम्बी दक्षिण गंगा अविरल धारा,
पुर्व कोशी बहथि पश्चिम गण्डक ई थिक मिथिला धाम ।।

जे ब्यवस्था, ब्यवस्थापन, तन्त्र आ मानवता सिखौलक,
ओ समानतावादी जनतान्त्रिक भूमी हमर मिथिला धाम ।।


नगीना कुमारी झा
(राष्ट्रिय अध्यक्ष, जनतान्त्रिक महिला संघ)
madhesh.tcp@gmail.com