• २०७९ असोज १७ सोमबार

पाप आ पुण्य…

अनीता साह

अनीता साह

जिनगी जिअल परीक्षा बाटे ।
क्षण सब करत समीक्षा बाटे ।।
पाप लोभ के गठरी बड़का ।
पुण्य करी लाभ मिली टटका ।।

गीता के बा सार अनोखा ।
पुण्य करी मत बाँटी धोखा ।।
दोसर के दुख आपन समुझीं ।
करनी लौटी ई कहल बुझी ।।

राम सिया के अद्भुत बिधना ।
भाग्य लिखल टार सकल ना ।।
दशरथ ब्याकुल बहुते भइले ।
बाकिर आपन प्राण गँववले ।।

नीमन सोची नीमन होई ।
पाई पीर जे शूल बोई ।।
साध मनुज जे मनवा भटके ।
ना त अधर में जिनगी अटके ।।


(वीरगंज । शिक्षिका; भोजपुरी, हिन्दी भाषा में निरन्तर रचनारत)
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