के करूँ मं माय - Aksharang
  • २०७८ असोज १२ मङ्गलबार

के करूँ मं माय

रानी सोनी ‘परी’

रानी सोनी ‘परी’

बिनणती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।
लाडलती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।

मोड़े तक तो ऊबे कोनी, पड़ी बा पाडा पावे ।
दांतण कुर्ला की न करणा, ओर कलेवो भावे ।
या आदत जियो बाकक ऐ, अब के करूँ मं माय ।
लाडलती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।

सूरजियो माथे चढ़ ज्यावै, पण न आगकक खोले ।
पेली म्हांन चाय पिलाओ, बाककन जोगड़ी बोले ।
बिन्या चाय के नी हाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।
लाडलती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।

भारी झाड़ी कदे करे न,कपड़ा में काट दे रांत ।
८ झूँणझूँणियो ले करें हतायां, बोकका काडे दांत ।
मेर प काम या टाकक ऐ, अब के करूँ मं माय ।
लाडलती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।

गकके म थैलो लटकाले, ओर भरये बाजारां डोले ।
म्हांन तो हिंदी न आवे, बा गिटपिट इंग्लिश बोले ।
उछकक मिनकी सी चाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।
लाडलती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।

फिका फल्लर साग बणावे, पतककी करदे दाकक ।
भात बणावै काचा पाका, फलका म आवे बाकक ।
कुण इका तोरण निकाकक ऐ, तूई बतादे माय ।
बिनणती फोड़ा घाल ऐ, अब के करूँ मं माय ।


(स्वतंत्र लेखन, गीता शतक का मारवाड़ी भाषा में रुपान्तरण जयपुर राजस्थान)
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