• २०७९ असोज १८ मङ्गलबार

वेदना

करुणा झा

करुणा झा

वेद छोडि़ वेदना जौं पढितौं
जीवन के कल्पना जौं पढितौं

आई ने दुर्दिन के दिन रहितई
मानव मन वंदना जौं पढितौं

दुख–दारिद्र, विषमता चहुंदिस
मोन कियैक अनमना जौं पढितौं

भाव नै भेटैछ अर्थभाव के
भाव प्रवण भावना जौं पढितौं

राजनीति में पिसा रहल अछि
जनता के यंत्रणा जौं पढितौं

सरकारी बैठक बकवासी
नेता के कुमंत्रणा जौं पढितौं

विस्थापित जे मातृभूमि स
ओकर मनभावना जौं पढितौं

संकटग्रस्त जखन छै वसुधा
संकट के सामना जौं पढितौं

राजा–रंक, धनी–निर्धन सब
तकदीर’क बिडंबना जौ पढितौं

क्षणभंगुर जीवन छै सचमुच
जीवन के सांत्वना जौं पढितौ
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‘दृष्टिकोण’

माँ

अशेष मल्ल

ग़रीब रिश्तेदार