• २०८२ चैत्र २०, शुक्रबार

डॉ. मुल्ला आदम अली की चार बाल कविताएँ

१. खेलों का महत्व

चलो खेलें, धूम मचाएँ,
कूदें, दौड़ें, ताकत बढ़ाएँ ।
स्वस्थ रहेगा तन और मन,
खेलों में है खुशियों का धन ।

फुटबॉल हो या हो कबड्डी,
दौड़ लगाएँ बनें हम धावक झटपट,
क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन खेलें,
मिलकर सब आनंद में झूमें ।

खेल हमें सिखाते हैं जीना,
हार-जीत को सही से लेना ।
मिल-जुलकर जब खेलेंगे हम,
बनेगा भारत सबसे दमखम !

तो आओ खेलें, मस्ती करें,
शारीरिक बल को पक्के करें ।
खेलों से सीखें मेहनत करना,
जीवन में आगे बढ़ते रहना !

२. हमारा देश, हमारा धर्म

भारत मेरा देश है प्यारा,
सबसे ऊँचा, सबसे न्यारा ।
नदियाँ, पर्वत, खेत, बग़ीचे,
हर कोने में बसी कहानी ।

तिरंगा मेरा गर्व बन जाए,
हर दिल में देशभक्ति समाए ।
हम बच्चे हैं, लेकिन जानें,
राष्ट्र धर्म सबसे ऊपर मानें ।

सच्चाई का साथ निभाएं,
झूठ, छल से दूर हट जाएं ।
विद्यालय में लगन दिखाएं,
भारत का नाम रोशन लाएं ।

दूसरों की सेवा करना,
सच्चा हिंदुस्तानी बनना ।
मिलजुल कर सब आगे बढ़ें,
भेदभाव से हम ना लड़ें ।

झांसी वाली रानी जैसी,
भगत, सुभाष, वीरों जैसी-
हिम्मत, मेहनत, त्याग का दीपक,
हम भी बनें उजियाले की किरण ।

राष्ट्र हमारा माँ के जैसा,
धर्म हमारा उसका हिस्सा ।
हम नन्हें दीप जलाएं ऐसे,
चमके भारत हर दिशा जैसे ।

३. हमारी प्रार्थना

हे प्रभु, हमें दो शक्ति प्यारी,
सच्चे राह पर चलने की जोड़ी,
दूसरों के दिलों में प्यार बढ़ाएं,
हर काम में सच्चाई अपनाएं ।

दया का दीप मन में जलाएं,
सपनों को सच बनाने सिखाएं ।
धरती माँ की हम सेवा करें,
भारत की शान को बढ़ाएं ।

सभी मित्रों के साथ रहें हम,
कभी ना हो दिलों में घमंड ।
हर दिन नई सीख हम पाएं,
दीन-दुखियों का साथ निभाएं ।

सपनों के आकाश में उड़ें हम,
सच्चाई की जो राह हो तम ।
प्रभु हमें हर कदम पर दें साथ,
हम बढ़ें आगे, ना हो कोई त्रास ।

४. साफ़-सफ़ाई की आदत प्यारी

हर दिन सुबह उठो मुस्काकर,
ब्रश करो दाँत, न हो टालमटोल यार ।
साफ़ कपड़े, चेहरा धोओ,
स्वस्थ रहो और खुश भी होओ ।

कूड़ेदान में कचरा डालो,
कभी न ज़मीन पर फैलाओ ।
झाड़ू लगाना बुरा नहीं,
घर की सफ़ाई है ज़रूरी कहीं ।

बाथरूम, बस्ता, जूते चमकाओ,
साफ़(सुथरा हर कोना बनाओ ।
हाथ धुलो खाने से पहले,
बीमारियाँ दूर रहें हमेशा के लिए ।

पेड़ लगाओ, न गंदगी फैलाओ,
पानी बचाओ, नालियाँ साफ़ रखवाओ ।
स्वच्छ भारत हो सपना अपना,
हर बच्चा बने इसका सपना ।


डॉ. मुल्ला आदम अली
तिरुपति, आंध्र प्रदेश, भारत