English Poem
नोरक सेहो खिस्सा होइत अछि
हर बुन्न मे नुकाएल एकटा खिस्सा रहैत अछि
कखनो सुखक संगी बनैत अछि
कखनो दुख बनि बहि जाइत अछि
कखनो चुपचाप गाल पर रुकैत अछि
आ कखनो आँखिये मे सुखा जाइत अछि
हर बुन्न मे एक अनुभूति होइत अछि
कखनो मजबूरी तँ कखनो सुखदायक होइत अछि
नोरक दाम बुझू, ई सस्ता नहि
हर बुन्न मे समुद्रक गहिराइ होइत अछि
हँसैत काल जे नोर खसैत अछि आँखिसँ
ओहु मे कोनो दुखक खिस्सा होइत अछि
जे नोर देखाइत नहि अछि
ओ बेसी दुखदाई होइत अछि
वैह असली नोर होइत अछि
जे मन के भिजबैत अछि
किए तँ हर बुन्न के किछु खिस्सा रहैत छै
एकरा व्यर्थ नहि बहाऊ
हृदय मे सम्हारि कऽ राखू
समय पर ओ अपनहि अविरल प्रवाह पकडि़ लेत
सुखक अछि वा दुखक
स्वतःएकर धार कहि देत ।
रागिनी मिश्र