• २०८१ श्रावाण ३ बिहीबार

लम्हों की किताब

डा. मुक्ता

डा. मुक्ता

लम्हों की किताब है ज़िंदगी
जिसमें अंकित रहता
जीवन- भर का लेखा- जोखा
सुख- दुःख, खुशी- ग़म, हानि- लाभ
ख्वाहिशों की एक लंबी फेहरिस्त
ज़रूरतों की अंडरलाइन सूची
कुछ अधूरे सपने
फलित होने को प्रतीक्षारत
और दमित आकांक्षाएं
उद्वेलित कर रहीं अंतर्मन
आ ! आत्मावलोकन कर
उनकी प्राथमिकता की सूची बनाएं
स्वयं को तनाव व अवसाद से बचाएं
जो मिला है, उसमें संतोष पाएं
जो नहीं मिला
उसे पाने का करें सार्थक प्रयास
ताकि चलता रहे खुशी से
ज़िंदगी का यह सिलसिला


डा. मुक्ता, गुरुग्राम हरियाणा, भारत