• २०८३ असार २१, आईतवार

गरज-बरस प्यासी धरतीपर फिर पानी दे मौला

निदा फाजली

निदा फाजली

गरज-बरस प्यासी धरतीपर फिर पानी दे मौला
चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है
सोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला

फिर रौशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें
झूटों की दुनिया में सचको ताबानी दे मौला
फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखर जा
फिर मंदिर को कोई ‘मीरा’ दीवानी दे मौला

तेरे होते कोई किसकी जान का दुश्मन क्यूँ हो
जीने वालों को मरने की आसानी दे मौला

साभार: काव्य