• २०७९ माघ २४ मङ्गलबार

स्पन्दन

रीता मिश्रा तिवारी

रीता मिश्रा तिवारी

कुछ अनकही और कुछ कही बातें..
रखा है सहेज कर उन लम्हों को..
यादोंकी पोटली में बांधकर !
रीते बक्से मेंबंद कर रक्खा है..
हर्षकी स्मिता को !
हर एक कोशिश थी..
बीते उन लम्हों के साथ..
हाथ हो मेरा तुम्हारे हाथ !
नदी तालाब झरने के रिदम को..
तुम्हारी सांसों से जोड़ दिया है..
मेरे ह्रदय स्पंदन को !
एक कोशिशकी उन लम्हों को..
संजो लिया रिक्त मन के कोने में !


रीता मिश्रा तिवारी, भागलपुर, बिहार