गलतीके सजा - Aksharang
  • २०७८ मंसिर १३ सोमबार

गलतीके सजा

कंचना झा

कंचना झा

खिड़की सँ चन्द्रमाके निहारि रहल छी । धीरे धीरे चन्द्रमा जेना शितल बरसाबैत भोर दिस प्रस्थान कऽ रहल अछि तऽ याह आस करि जे भोरक सुरजक लाली संग काल्हिके दिन एकटा नव शुरुआत लक एतै, मुदा आजुक राति केनाक कटतै से नहि जानि ? आँखि सँ निन हेरा गेल अछि । रातिके दुई बाजि रहल अछि मुदा निन आँखि सँ कोसो दूर अछि । एकटा निर्णय पर पहुँच तऽ गेल छी मुदा कि निर्णय सभकियो मानत ? अहि दुविधामे ओछावन पर करवटि बदलि रहल छी । चंद्रमाके निहारैत डबडबायल आँखिमे किछ सपना पलि रहल अछि आ सत्त कहूँ तऽ भविष्यके लेल अपनाआपके तैयार कऽ रहल छी । काल्हिके भोर कोन रंग आनत जिंनगीमे से नहि जानि ? अपना आपके जतबे मजबूत करऽ चाहि रहल छी ओतबे अपना आपके कमजोर महसूस कऽ रहल छी ।

अमर बिनाके जिंनगी कोनाक काटब अहि दुविधामे छी ? अहि प्रेमक शुरुआत बहुत सुन्दर भेल छल । भगवानके बनावौल गेल जोडि़क नाम देल गेल यानी विवाहके पवित्र बंधनमे बान्हल गेल छलहुँ हम आ अमर । हम अथाह प्रेम लकऽ आयल छलहुँ मुदा प्रेमके बदलामे प्रेम भेंटै से कोन किताबमे लिखल अछि ? और फेर जिंनगीके अंत सोहनगर होई से तऽ जरुरी नहि अछि ने । हम प्रेम करैत छी, अगाध प्रेम करै छी जकर कोनो हिसाब नहि । अमर सेहो प्रेम करैत छथिन अंतर एतबे जे हमरा सँ नहि किनको और सँ ।
हम बहुतो चाहलहुँ जे अमर सन बनि मुदा हमर हृदय हुनका सन नहि अछि । ओ विशाल हृदयके छथि । जाहिमे दुनूके समा लेने छथि । मुदा हम हम छी । अहि खलिश, अहि कसक अहि टिस, अहि पीड़ाके संग जे हमर पति हमरा बहुत इज्जत करैत अछि । मान सम्मान देने अछि मुदा प्रेम… ककरो और सँ करैत अछि । अहि पीड़ाके संग हम केनो जीब ?
अहि दुई दशकके विवाहमे अमर सेहो कुहैक कऽ रहि रहल छथि । मुदा हमरा कहियो शिकायतके अवसर नहि देलाथि । ताहि सँ हम भागमंत छी जे ओ हमरा नहि हम हुनका छोडि़ रहल छी । हमरा बुझल अछि जे संगे रहैत हम दुनू एक दोसरके आदति बनि गेल छी मुदा हम प्रेमके भूखल छलहुँ । भुखले रहि गेलहुँ । कछमछ करतहि छलहुँ कि माए आबि गेलखिन आ हमरा दिस देखैत बजलिह
-रुमक बत्ति जरैत देखलहुँ ताहि सँ आबि गेलहुँ ।
हम उठिके बैस गेलहुँ । आबथ न माए
बैसत कहलिह- कनिया… निन कत्त हेरा गेल अछि ? अमर नहि अछि ताहि सँ निन नहि भऽ रहल अछि की ? हाँसैत कहलिह ।
तेहन कोनो बात नहि अछि माए
तऽ कोनो दुविधामे छी ? किछु दुखके बात छी तऽ हमरा कहुँ हमहूँ तऽ माए सन छी ने ।
माए अहाँके नहि कहब तऽ ककरा कहबै ?
कोन चिंता खेने जा रहल अछि अहाँके ? हमरा दिस ताकैत पुछलिह ।
अहिबेर जहिया सँ अमर गेल अछि अहाँ कहियो बात नहि कयलहूँ अमर सँ, कि बात झगड़ा भऽ गेल अछि की ?
नहि माए हमरा सभके झगडा कहाँ होइत अछि ।
हँ से तऽ हम बड भागमंत जे अमर सन बेटा आ अहाँ सन पुतहुँ भेंटल । हाँ तहन निन कियाक नहि भऽ रहल अछि ?
माए ओना तऽ काल्हि भोरे हम हिनका सँ बात करबै करितहुँ  मुदा ….।
कि बात करबाक अछि जकरा लेल अहाँ काल्हिके इंतजार कऽ रहल छी ?
माए हम… ओ…
कि माए हम ओ
साफ साफ बात कहुँ मोनमे कि चलि रहल अछि ?
माए हम… किछु… फैसला…
फैसला… एैं कि कहैत छी ?
माए हिनका तामस तऽ नहि चढतनि न
नहि अहाँ कहुँ तऽ
माए मीता एखनहुँ अमर के जिंनगीमे अछि ।
मीता… माए आश्चर्य सँ बजलीह
हाँ माए… मीता… हम कहलहुँ ।
केहन बात कहैत छी ? आब क्यिाक मीता ओकर जिंनगी में रहत ? माए परेशान होइत बजलिह । ओकर अप्पन जिंनगी अछि आ अहाँके अमरके अलग जिंनगी ।
हाँ माए हमहूँ तऽ याह बुझैत छलहुँ जे मीता अप्पन दुनियामे अछि आ हम अप्पन मुदा ई सत्त नहि अछि । मीता आ अमर एखनहुँ एक दोसर सँ बहुत प्रेम करैत अछि । माए अमर आइयो ओकरा लेल दुखी छथि । अप्पन जीवनमे ओकर कमी महसूस करैत छथि । मीताके बिना हुनक जीवनक कोनो अर्थ नहि माए ।
वियाहके २५ वर्ष बितलाके बादों अमरके मीताके कमी खलैत अछि यानी हमरा सँ प्रेम अमर के कहियो नहि भेल ।
धुर इ कि कहैत छी ?
हाँ माए अमर सेहो कुहैक कऽ रहि रहल छथि हमरा संगे आ हम सेहो
हमरा तऽ किछु बुझबामे नहि आबि रहल अछि ।
माएके हाथ पकडैत हम कहलहुँ-
माए हम मरि गेल छी ताहि सँ हिनका सँ एहन बात कऽ रहल छी आ दोसर माए इ समाजके देखेवाक लेल जे हम बहुत खुश छी, ई देखावटीपन सँ, अहि नाटक सँ बाहर निकलय चाहैत छी ।
माए हम जी नहि सकब ई बुझैत जे अमरके मोनमे आइयो हम नहि मीता अछि । फेर माए अमर हमरा सँ नहि प्रेम करैत छथि मुदा हम तऽ प्रेम अमर सँ करैत छी ने । आ प्रेममे सदैरखन अप्पन मोन नहि देखल जाइत अछि ।प्रेमके मतलब तऽ ओकर खुशीमे अप्पन खुशीके तकनाइ अछि माए माएके आँखि सँ नोर बहै लागल आ कहलिह अहाँके रहैतमे अमर मीताके नहि भऽ सकैत छै । ई सरासर अन्याय हेतै ।
माए आब जे कहथुन मुदा हमरा लेल इ भार अछि आ अहि भारके संग हम नहि जिब सकब जे हमर घरवाला हमरा सँ प्रेम नहि कऽ दोसर स्त्रीके प्रेममे अछि । आ हम सति सावित्री बनि ओकरा संगे रहि । या फेर बांकिके पूरा जिंदगी अहिना कुहैक कुहैक कऽ बिताबी ।
तहन अहाँके फैसला की ?
माए हम अलग रहैय चाहैत छी
माए आश्चर्य सँ हमर मुँह ताकैत बजलिह- कि अहाँ तलाक लेब अमर सँ ?अहाँ मतलब बुझी रहल छी, अहाँके दुनू बच्चाके कि हेतै ? हमर कि हेतै ? घर परिवारके सर समाजके लोक की कहत ? सभकिछु सोचि नेने छी ।
सर समाज कियो कि कहतै माए ? हम जे भोगि रहल छी हमहीं भोगबै । फेर माए हमरा बुझल अछि जे हमर बात अगर कियो खुब निक सँ बुझत तऽ इहे छथिन । माए ई सभदिन हमरा लेल ठाढ़ रहलिह । हिनका सँ तऽ कोनो बात नहि नुकायल अछि । हम तऽ अप्पन सभटा बात हिनका सँ करैत रहैथ छलहूँ ।
एकटा बात सोचथुन तऽ माए, जहयिा सँ वियाह कक एयलहुँ कहियो नवकनिया जकाँ नहि रहलहुँ ।
नवविवाहिताके जे एकटा साज श्रृंगार होइत अछि । एकटा जे उत्सुकता होइत अछि पतिके अप्पन पत्नीके लेल हम कहियो नहि बुझलहुँ । तइयो माए हम चुप रहि गेयलहुँ । सोचैत रहैत छलहुँ जे सामान्य पति पत्नी सँ हम दुनू गोटे अलग कियाक छी ?
माए प्रेमक शुरुआत तऽ सच्चाई सँ भेल छल । अमर हमरा सभ बात कहि देने छलाह जे मीता आब हुनक जिंनगीमे नहि अछि आब हम आ हमहिं छी तहन एहन बात क्यिाक माए ?
माए हम तऽ सभकिछु बिसरि कऽ अमर संगे एकटा नया जीवनके सफर पर चलनाई शुरु केने छलहूँ । ओहि कष्ट ओहि तकलीफ सँ बाहर नहि आबि पाबि रहल छी माए।
अमर सभदिन झूठ बजलाह माए तकलीफ अहि बातके अछि जे हुनका मोनमे अगर मीता आइयो छल तऽ हमरा क्यिाक नहि कहलाह ?
हम अप्पन २५ साल एना हुनका मीता सँ अलग नहि होमय दैतिये माए । बहुत एहन क्षण आयल जिंनगीमे जहन अमरके आवश्यकता छल हमरा आ ओ हमरा संगे नहि छलाह ।
माए दुखित होइत कहलिह- दुख तऽ अहि बातक अछि जे अमरके संगे अहाँ सेहो इ सभ बात हमरा नहि कहि सकलहुँ ।
माए मोन बहुत दुखायल छल ताहि सँ किछु नहि कहि सकलहुँ फेर इहो दुखित भऽ जेतिह, हिनका सेहो चिंता भऽ जेतैन अहि उलझनमे रहि गेयलहुँ माए ।
माए हमरा दिस टुकुर टुकर देखैत रहि गेलिह मुदा हम बजितहि रहि गेलहूँ-  दुखके क्षण कटनाए बहुत मुश्किल होइत अछि माए । आदमी सभकिछु बिसर सकैत अछि मुदा जहिया हमरा अमरके बहुत जरुरत छल अमर हमरा संगे नहि छलाह । हम अहि अहसासके संगे आब नहि जीब सकब । माए हमरा मुक्ति चाहि
हमरा अहि बंधन सँ मुक्त कऽ दैथ माए
हम मरि जायब अहि सोचिकके जे हम मात्र आ मात्र दायित्व छी अमरके , प्रेमक भागी नहि । २५ साल सँ अमर हमर दायित्व नहि चाहैत उठा रहल अछि तऽ कि हमर दायित्व नहि बनैत अछि जे हम अमरके खुशीके सोचि ।
अमर सँ बात भेल अछि ?
हाँ माए बात भेल अछि । अमर अप्पन जिम्मेदारीके वहन करवाक लेल एखनहुँ तैयार अछि ।
मुदा आब हम तैयार नहि छी माए । हमर आत्म सम्मानके बात सेहो अछि ।
अहि सत्तके संग जे अमर मीताके प्रेममे अछि । हम एकटा घरमे केना रहि सकैत छी ?
अहि पर माए कहलिह जे हे- अमरके मोन हमरा नहि बुझल मुदा हम आ धियापुत्ता सभ केना रहब ?
माए प्रेम मात्र संगे रहलाह सँ नहि होयत अछि । प्रेम विश्वास मांगैत अछि । प्रेम तऽ इ न माए जे जिनका सँ प्रेम करैत छी ओकरा लेल सोचू । ओकर खुशीमे शामिल होई । अप्पन प्रेमीके प्रेममे खुश होई ।
फेर माए एकटा बात सत्त अछि जे अमर हमरा सँ नहि मुदा हम तऽ अमर सँ प्रेम करैत छी न तऽ हुनकर खुशीमे हमर खुशी । माए ओ कहियो एसगर नहि हेताह । हुनका संगे मीताके प्रेमक याद अछि आ हमरा संगे हमर पतिके याद जाहिके संगे हम जी लेब माए । हमर प्रेम तऽ जाधरि जीब हमरा संगे रहत मुदा जँ हम संगे रहब माए तऽ कुहैक कुहैक कऽ मरि जायब ।
तऽ कि एकर एक मात्र याह रस्ता अछि तलाक । तलाक कहाँ माए । तलाक कहाँ लऽ रहल छी हम दुनू गोट एक संगे एकहिटा घरमे नहि रहब माए । हुनक अप्पन दुनिया अछि तऽ हमरो अछि । हम अहिके संगे नहि रहि सकैत छी जे हमर मात्र जिम्मेदारी उठाबैत । माए सदैरखन मोन कचोटैत अछि जे हमर गलती अछि । अमरके हमरा सँ प्रेम नहि भेल तऽ हम असफल भेल छी माए । हमर गलती । हम अमरके गलती नहि कहैत छी । कि अमरके अहि बातके पचतावा अछि जे अहांके मोनके कतेक पीड़ा पहुँचेने अछि ।
हाँ माए हुनका बुझबामे आयल अछि जे किछ गलती तऽ भेल अछि मुदा आब अहिमे बहस केला सँ कि होयत ? आब ओ दिन घुरिके नहि आयत । आब गलती बुझबो कयलथि तऽ कि माए ? शायद हमर एसगरपनके पीड़ाके ओ नहि बुझी सकलाह । ओ अप्पन मीताके यादमे एतेक उलझल छलाथि जे हमर एसगर पन खालिपनके पीड़ा हुनका देखाई नहि देलक ।
अहिपर माए बजलीह-
गलती अहाँ दुनूके नहि अछि । आइ हमरा एकहिटा बात बुझबामे आयल जे समय बदलि रहल अछि । पहिनका सन बात आब नहि रहल । आब बहुत बात विचार कयलाके बादे विवाह करवाक चाहि । गलती अभिभावक सँ सेहो होइत अछि । गलती अछि त हमर सभके जे हम सभ सबटा बात बुझैत अमरके विवाह अहाँ सँ करवा देयलहूँ आ इ नहि बुझी सकलहूँ जे अमर अप्पन जिंदगीमे दोसरके नहि आबै देतै । हमर सभके गलतीके सजा अहाँके क्यिाक भेंटै ? हमर सबके गलतीके सजा याह हेतै जे हम आ पूरा परिवार अमर आ अहाँके अलग अलग देखब आ कुहैक कुहैक कऽ रहब ।
मुदा आई एकटा साउस अप्पन पुतहूँके संग देत आ जे गलती हम केयलहुँ ओकर पश्चाताप सेहो हमहीं करब ।
हमरा खुशी अहि बातके अछि जे हम अहाँके पैरके जंजीर नहि बनब, हम रोकब नहि अहाँके, अहाँके पूरा अधिकार अछि अप्पन जिंनगी पर अहाँ जेना चाहि एकरा सवारि सकैत छी । रहल बात अमरके तऽ अमरके अप्पन गलतीके सजा जरुर भेंटत । अहाँ सँ दूर भेलाके बाद हुनका बुझवामे आयत अहाँके प्रेम ।


कंचना झा रेडियोकर्मी एवं उप प्राध्यापक- पद्मकन्या कैम्पस
kanchanajha1978@gmail.com