• २०८१ असार २८ बिहीबार

प्रकटरूप में ईश्वर को अवतार है माँ

इन्दु तोदी

इन्दु तोदी

सरल सरस सुन्दर अद्भुत माँ ,
सजल नैणा स्यूं मुसकावै माँ,
एकाक्षर में निहित जगत माँ,
ओंकार स्यूं रंचभर भी कम नही माँ
त्रिभुवन त्रिलोक की गति माँ,
ध्यावना मात्र स्यूं मिलजाव थ्यावस,
घेर सक नही कोई रात की अमावस,
देव मुनी जन सै तेर आगै नतमस्तक,
मिनख जिनावर स तेरै माथै आश्रित,
गीता की सार सरिता की प्रवाह,
गऊ, देवी सहस्त्र शक्ति नवदुर्गा,
असाध्य रोग में औषधी उपचार,
कर देव पल मै विपदा को संहार,
सृष्टि सुत्रधारिणी जगत कारिणी,
जीवन की सुर ताल लय रागिनी,
अन्तिम साँस तक सुख की आस,
कटिलै पथ मै मखमली आभास,
अंधियारै गलियारै में जगमग ज्योति,
शितल,अग्नि, दृष्टि, बृष्टि, सृष्टि,
गुणां को बखान नही कर सकती
आदि शक्ति, नवदुर्गा सरस्वतीब
सागर सी गहरी पर्वत सी महान,
चुका सकै नहीं माँ को कर्ज संतान,
आशीर्वाद स्यूं सौ काम होवै सफल
जनम जनमको जप तप को है फल,
कलयुग मै सौ मिथ्या, पण साँची माँ १
प्रकट रूप में ईश्वर को अवतार हैं माँ ।।।


(कवियित्री, स्वतंत्र लेखन, अध्यक्ष, नेपाल अग्रवाल महिला मंच, धरान, नेपाल)
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