• २०८२ फाल्गुन ७, बिहीबार

सहारा

नरेश अग्रवाल

नरेश अग्रवाल

ये फूलों की लतर
देखते- देखते पेड़ के तने पर चढ़ गई

अब डालियों को स्पर्श करती
शीर्ष तक पहुंच गई
और अपनी खूबसूरती बिखेरने लगी

कितना सुंदर सपना है
इन नन्ही चीजों के पास भी

अगर पेड़ आकाश जितना ऊंचा हो
तो उसे भी स्पर्श कर लेती हैं

बस दृढ़ सहारा चाहिए
कमजोर पांवों को !


(जमशेदपुर, झारखंड निवासी अग्रवाल का कविताओं पर १० पुस्तकें तथा अन्य विषयों पर ८ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।)
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जो चोर उसकै ठूलो स्वर

जोगी !

फरक– ३