English Poem
नदी जिस तरह थरथरा कर
हवा जिस तरह लहराकर
बालों में गूँथे फूल
प्रकम्पित होकर
अपने मोबाइल से देता है
सन्देश फूलों को
पहाड़ों को, लाल सूर्य को
तभी तो उगता है प्रेम
हाँ ! उसी की बात कर रही हूँ
वो प्रेम नही तो क्या है ?
जो कठोर शिलाओं के बीच से
निकलती है एक नन्ही कली
चूमना चाहती है
उसी तरह,
जैसे नदी पत्थरों को
जैसे नाव नदी को
लहरें किनारों को
धान की सुनहली बालियां
सूरज की लाली को
(डॉ ओस हिन्दी की चर्चित कवि हैं)
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