• २०७९ असोज १६ आइतबार

अंतिम आदमी

डॉ. अनुराधा ‘ओस’

डॉ. अनुराधा ‘ओस’

अंतिम आदमी
जोह रहा है सभ्यता की
वो खड़ा है कतार की
आखिरी पंक्ति में
उसके पास पहुँचता है
सब कुछ सबसे अंतिम में

सरकारी योजना भी
वहां पहुंचते- पँहुचते
दम तोड़ देती है
रक्त रंजित युद्ध
उन्हे नही लड़नी है
उन्हें लड़नी होती है
भूख की लड़ाई
अपने अस्तित्व की लड़ाई
ताकि बचे रहे धरती पर
कुछ इंसान

अंतिम आदमी सिर्फ
नही लड़ता भूख से
बल्कि वो जंगल और पहाड़ के
अस्तित्व के लिए भी
लड़ता है
ताकि धरती पर कुछ
धरती बची रहे ।


(डॉ. ‘ओस’ हिन्दी की चर्चित कवयित्री हैँँ ।)
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