• २०७९ असोज २१ शुक्रबार

मन्नत का धागा

डा आरती कुमारी

डा आरती कुमारी

मन्नत के धागों में
बांध दिया है तुम्हे
और हर फेरे के साथ
बांध रही हूँ एक गांठ
हमारे प्यार की लंबी उम्र के लिए
हमारे अटूट विश्वास के लिए
हमारी दीवानगी के लिए
हमारे एक दूजे के प्रति
समर्पण के लिए
हमारी मुस्कुराहटों के लिए
बदनज़र से हमारे प्यार की रक्षा के लिये
और अंतिम फेरे में चाहती हूँ लपेट लेना
खुद को ही तुम्हारे संग
ताकि जी सकूं हर सांस
रहकर तुम्हारे क़रीब
और
मन्नत पूरी होने में रह न सके…
कोई भी दूरी..।


(सहायक शिक्षिका, मुजफ्फरपुर, बिहार, भारत)
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