• २०७९ असोज १९ बुधबार

साहस

नगीना झा

नगीना झा

बहुत भ गेल सभक्क अत्याचार
नही सैह सकब आब आउर अपराध !
कतेक सैहिक नोर झाइर हम बैसु
आईँखक गहना कतेक हम सुखाउ !!

सभक बात रहलैइ अहिना सबदिन
कहियो नैने भेल गेल कुनो परिवर्तन !
जीवनक धारक बाट भेल दु तीर
काँटो स बेसी बिझल, बोलीक तीर !!

नही चाहितो भरियाक भेल छि भार
नही सोँचीतो फसल अछि जीवनक जाल !
ऋण पहाड बनी रहल कर्तव्यक
उपहास उइठ रहल, लिखल भवितव्यक !!

डरके मारल भय मे नही जीव सकब
सिम्लक रुवा जका नही उइड सकब !
बहुत सभाक उपहास सहलौँ, आब नही
बहुत स मोनक चोट खेलोउ, आब नही !!

रीतिक बन्धन सीमा देखु नघाओल
मोहक बोझक भारी तैयो रहीऐ गेल !
देखियोउ सहासक डोरी त आब टुटिगेल
सबक कर्जा सेहो उधारे, अपने रहिगेल !!


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