बताई मत - Aksharang
  • २०७९ जेठ ८ आइतबार

बताई मत

डॉ.विभा रजंन (कनक)

डॉ.विभा रजंन (कनक)

दिल के दुःख केकरो अब बताई मत,
केकरो के आपन दुखड़ा सुनाई मत ।

केहु समझे वाला नइखे राउर दरद,
झुठहीं के आसरा अब लगाई मत ।

हँसे वाला हजार मिलिहें जगत में,
बाकि रउरा केहु पर पतियाई मत ।

कहे के बहुते लोग आपन कहेला,
ई कहके अपना के भरमाई मत ।

आपन भाग में जेबा उ मिलबे करी,
अधिका खातिर कबो ललचाई मत ।

बडा भाग से होला मानुष–जनम,
खेल–खेल में एकरा के गंवाई मत ।

भाग से अधिकाआ समय से पहिले,
जे कहेला ओकरा पर पतियाई मत ।

जे रउरा किस्मत बा उहे ता होखता,
आपन मन के अधिका भरमाई मत ।

जे भी करि उपर वाला निके करी,
दोसर के देखि रउरा इरसाई मत ।

कबो त धरिहें भगवान आपन हाथ,
बस अब खुल के मांगी लजाई मत।

जिनगी में सुख दुःख लागले रहि,
परीक्षा देवे में कबहुँ घबडाई मत.!

……………………………
(स्वतंत्र लेखन, नई दिल्ली, भारत)


सत्य

दसैं

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