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इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है,
भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है !
जागी आँखों से मैंने सपना देखा,
हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है !
किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में,
हर डाली को काट रहा खुद माली है !
जनता को बहकाता झूठे वादों से,
जिसका हर इक आँसू ही घड़ियाली है !
सबको ही दुःख-संतापों ने है घेरा,
ज़हन यहाँ पर किस इंसा का खाली है !
बलजीत सिंह बेनाम
हरियाणा -भारत