• २०८३ कार्तिक १, शनिबार

ग़ज़ल – दीवाली

बलजीत सिंह बेनाम

बलजीत सिंह बेनाम

इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है,
भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है !

जागी आँखों से मैंने सपना देखा,
हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है !

किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में,
हर डाली को काट रहा खुद माली है !

जनता को बहकाता झूठे वादों से,
जिसका हर इक आँसू ही घड़ियाली है !

सबको ही दुःख-संतापों ने है घेरा,
ज़हन यहाँ पर किस इंसा का खाली है !


बलजीत सिंह बेनाम
हरियाणा -भारत