• २०८३ भाद्र १२, शुक्रबार

अशोक बाबू माहौरका चार हाइकू

अशोक बाबू माहौर

अशोक बाबू माहौर

आधी रात है
सन्नाटा पसरा है
ड़रते हम ।

बादल घने
बारिश धीमे धीमे
शीतल हवा ।

घर से दूर
आँधियाँ आ रही है
मन ड़रता ।

सड़क चौड़ी
भीड़ खचाखच है
चलना कैसे ।


अशोक बाबू माहौर