• २०८३ श्रावण ८, शुक्रबार

गजल

रामकृष्ण अनायास

रामकृष्ण अनायास

हर रोज़ एक बार मुझे सताया करो न,
प्रेमी हूँ तुम्हारा, हक़ जताया करो न ।

रूठने-मनाने का भी अपना ही मज़ा है,
यूँ ख़ामोश रहकर न तड़पाया करो न ।

ये आसमाँ, ये तारे सब तेरे ही लिए हैं,
इस तरह मज़ाक कर कभी हँसाया करो न ।

प्रेम में तड़पना भी मोहब्बत का मज़ा है,
फिर कभी-कभी मुझको तड़पाया करो न ।


रामकृष्ण अनायास
चितवन, नेपाल