• २०८२ माघ ११, आईतवार

कश्मिरी लाल चावला का दस हाइकु

कश्मिरी लाल चावला

कश्मिरी लाल चावला

बोलता रहा
खामोश समय भी
बात ना हुई

पतझर है
उनके जाने के बाद
बहार कहाँ

मैं तो माटी थी
राम का नाम लेते
माटी हो गई

आँख मूंद के
अंदर झरती मार
मिली परमात्मा

हम रहते
शुन्य लग रहा है
यह संसार

चाँद बन लो
कलावे बीच रहे
यह संसार

भारत भूमि
प्रेम गीत गा रहे
सारे जो लोग

सांसों के बीच
भारती हवा रहे
चले जीवन

मन की मैल
आँखों के आँसू साथ
साफ हो जाती

मन व सिर
फूल गुलाब खिले
सजे धरती ‘।


कश्मीरी लाल चावला
संपादक अदबी माला मुकतसर 152026