• २०७९ मंसिर २१ बुधबार

सुनो जी

सविता वर्मा

सविता वर्मा

सुनो जी ! सुनो हो क्याम्हारी बात ?
‘अरे भाग्यवान तुझ ही तो सुनता आ रा हूँ पिछले तीस सालों से जब स तेरे साथ सात फेरे लिए हैं’ लाखन मुस्कुराते हुए अपनी पत्नी की तरफ देखकर बोला । मगर उसकी पत्नी थी कि बैठी थी मन उदास किये, फिर कुछ देर सोचकर बोली कि अच्छा एक बात तो बताओ तम ? अरे पुछगी बीइब, कधी सुनो जी, अर कधी बताओ जी । सीधी-सीधी बोल दे जो पूछना तुझू इस बार लाखन थोड़ा क्रोधित होते हुए बोला ।

‘मामयूँ पूछूं थी अक यो जो कोरोना का रिश्तेदार ओमीक्रोन आ रा यो किंघे कू आवगा ? उसकी पत्नी ने अलमारी में से नई साड़ियों को उलट-पलट करते हुए कहा । लाखन पत्नी के बेतुके सवाल को सुनकर झुंझलाते हुए उसकी तरफ घूरकर बोला ।
‘अरे बावली यो ओमीक्रोन क्या मेरा साला लग ह जो मुझ पता होगा, अक किंघे क’आवगा, अर किंघे कू जावेगा । अर अक्ल त पैदल, तू बन तो बहोत हुशियार, अर बात कर ह बावलों वाली । तू मुझ एक बाबता कोरोना का यो रिश्तेदार ह या कोरोना ही मुखोटा लगाक आरा ह,मका यो कोई आदमी ह क्या ?
अकजो इन्घे अर किंघे कू आवगा ? ।
अर तू मुझ एक बात बता तू वोट किस देवगी ?
लाखन न बीड़ी का टैंटू धरती पर रगड़ क फेंकते हुए कहाँ ।

उसकी पत्नी बी अब शॉल का बुक्कल मारते हुए लाखन कू घूरते हुए बोली ।

‘अर जो यो ओमीक्रोन बीमारी आरी ह तो मन्न नूं बीबता दो तम अक या बालकों के स्कूल, लोगों के शाददी- ब्याह म ही क्यों घुस जाआक ? अर यो एलक्शन म, इन नेताओं की मीटिंग- सिटिंग अर जुलूसों म क्यूँ ना घुसता ?कितने घने दिनों म तो पीहर म भतीजे का ब्याह सुझा, पिछले दो साल त हर साल शाददी-ब्याहम जान खातर उमहा क रह जां ना तो नवी धोती साड़ी पहर पात्त्ते अर ना हीदावत- सावत ही खान कू मिलती । दुखी होंगे हम तो हे भगवान जान इब यो ब्याह का कैसो होगा,अर थोड़े लोग कर दिए सरकार न तो म्हारी तो गयी दावत इस साल बी ।

अर हां म क्यों बताऊँ अक वोट किस दूंगी इतनी बी मोटी बुद्धि ना समझो, म तम बी ना बताऊं वोट किस देऊंगी यो तो म्हारा अधिकार ह जो हम देश का भला करने वाला लगगा उस ही दे दगे वोट बी ?

‘देख तू सोच यो सब बैठ क, मेरे प टेम ना ह तेरी फालतू की बातों का, मैं जा रा हूँ नेताजी का भाषण सुनन, देखँइबके के मुफ्त म मिलगा, जो जितनी सुविधा देगा उस ही वोट देंगे, अर दिके एक बात बताऊं फोन करक मुझताहिये ना, अक घर आजा । दिके दावत-पानीखा-पी कही आऊंगा, समझी तू ? कहते हुए लाखन अपना गमछा और गर्म लोई ओढक घर से बाहर निकल गया ।

उसे जाते देख उसकी पत्नी घर के किवाड़ बन्द करते हुए बड़बड़ाने लगी । ‘दावत-पानी के लालच म तू कोरोना या उसके लगे-सगे ओमीक्रोन कू लेक आया तो तुझ घक्का देक वहीं गेरूँगी जिनकी तू मीटिंग अर भाषण सुनन जा । म्हारी तो दो साल त दावत बी छूट जा अर इस भाषण सुनने की पड़री । राम जान इन नेताओं कू कोई डर-भय क्यूँ ना लगता । इलेक्शन होते ही हवुव्वा बना देंगे और लगा देंगे लोकडाउन ।


सविता वर्मा, मुजफ्फरनगर