• २०७९ मंसिर २१ बुधबार

प्रतीक्षा का चांद

दिव्या सक्सेना

दिव्या सक्सेना

प्रतीक्षा का चांद
पूज लिए गए
चांद सारे
आज धरती पर
प्रेम घुल रहा है
चारों ओर
इस शुभ अवसर पर
व्रत पूर्ण हुआ
और किया गया जलपान
चांद को देखकर
तृप्त हुई हर सुहागिन

मगर घोर वियोगकी पीड़ा में
आज हर विधवा
और विस्मित है
अविवाहिता प्रतीक्षा में
चांद को एकटक
निहार कर…


दिव्या सक्सेना, दिल्ली, भारत