• २०८१ श्रावाण १० बिहीबार

बैरी सावन

सुषमा दीक्षित शुक्ला

सुषमा दीक्षित शुक्ला

हाय रे आया बैरी सावन
आवन कह गए आये न साजन ।
भूल गए हैं मेरे साजन ।
आवन कह गए आये न साजन ।

रहती हूँ मैं खोई खोई ।
रोग लगा है जैसे कोई ।
कब से न मैं तो चैन से सोई ।
रात दिवस मेरी अँखियाँ रोई ।

सुनी है सेजिया सूना आँगन ।
भूल गए हैं मेरे साजन ।
हाय रे आया बैरी सावन ।
आवन कह गए आये न साजन ।

नागिन जैसी डसती रतियाँ ।
वो बालम की मीठी बतियाँ ।
दिल जलता है रोये अँखियाँ ।
ढाँढस देती सारी सखियां ।

कजरा घुलता जाए प्रीतम।
सौतन ने क्या रोके बालम ?
हाय रे आया बैरी सावन ।
आवन कह गए आये न साजन ।


सुषमा दीक्षित शुक्ला
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