• २०७९ असोज १९ बुधबार

वज़ूद

सीमा पटेल

सीमा पटेल

इस कायनात में
अगर कुछ है
तो वो सिर्फ
‘वज़ूद’
अगर वो है
तो ये सारी दुनियाँ
तुम्हारे पक्ष में है ।

इसलिए,
स्वयं को
पढ़ो,
लिखो,
सँवारो,
निखारो,
अपने लिए भी,
कुछ वक़्त निकालो !

ख़ुद से खुद के
दफ़न किये गए शौकों को
पुनः जीवित करने के लिए…
गाओ,
गुनगुनाओ,
थिरको
अपनें मन की मधुर तान पर… !

बार- बार निहारो,
आईने में ख़ुद को,
सज- संवर कर,
मुग्ध हो अपने ही रूप पर,
अपनी ही देहदृष्टि पर,
ये सुंदरता तुम्हारी है,
सिर्फ तुम्हारी अपनी है !

करो रसास्वादन
अपने गुणों का
अपनी कलाओं का
अपनी खूबियों का !
क्यों कि…
इसी से तुम्हारा ‘वज़ूद’ जिंदा है
तुम्हारी पहचान जिंदा है
तुम्हारा अस्तित्व जिंदा है !

अगर तुम्हारा वज़ूद
सबल है तो सबल भी
तुम ही बनोगी… !
क्या जीना ?
दूसरों की मुस्कुराहटों के लिए
अपने को रुला कर
अपना मन मार कर
दूसरों की ख्वाहिशें
पूरी करने के लिए !

वो दूसरा है
दूसरा ही रहेगा
तुम्हारा नही होगा
अगर होता वो तुम्हारा
तो तुम्हें बिखरने न देता
स्वयं की खुशियों के ख़ातिर
तुम्हें मिटने न देता
इस कदर एक दायरे में तुम्हे
सिमटने न देता !

तुम, तुम्हारा वज़ूद
ही तुम्हारा अपना है
और कोई दूसरा नहीं
इसलिये,
सहेजो ‘स्व’ को ।


(हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर पटेल हिन्दी की चर्चित कवयित्री हैं ।)
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