• २०८१ असार २८ बिहीबार

गंगा मइया

सुषमा दीक्षित शुक्ला

सुषमा दीक्षित शुक्ला

अमृत है तेरा निर्मल जल
हे ! पावन गङ्गे मइया ।

हम सब तेरे बालक हैं
तुम हम सबकी प्यारी मइया ।

हे ! मां सब के पाप मिटा दो
तुम पाप नाशिनी मइया ।

अब सारे दुःख क्लेश मिटा दो
हे ! पतित पावनी मइया ।

भागीरथ जी के तप बल से
तुम आई धरणि पर मइया ।

शिवशंकर के जटा जूट से
प्रगट हुई मेरी मइया ।

हे ! जान्हवी हे ! मोक्ष दायिनी
अब पार लगा दो नइया ।

सगर सुतों को तारण वाली
भव पार लगा दो मइया ।

इस धरती पर खुशहाली
तुमसे है गङ्गे मइया ।

आंचल तेरे जीना मरना
हम सबका होवे मइया ।

मां शरण तुम्हारी आयी
हे ! मुक्ति दायिनी मइया ।

हम सब तेरे बालक हैं
तुम हम सबकी गङ्गे मइया ।


सुषमा दीक्षित शुक्ला, राजाजीपुरम, लखनऊ, उ. प्र. भारत
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