• २०८१ श्रावाण ९ बुधबार

गज़ल-हिन्दी

डॉ साकिब हारूनी

डॉ साकिब हारूनी

 

लहु को हम ने पानी लिख दिया है
हक़ीक़त को कहानी दिख दिया है

किसि को चमपई जूही व बेला
किसी को रात रानी लिख दिया है

मेरी ख़ामोश तबई देख करके
किसी ने बे ज़ुबानी लिख दिया है

जमीनी बात मनवाने की खातिर
अदब से आसमानी लिख दिया है

हवेली है मेरी जिद्दत की हामिल
मगर फिर भी पुरानी लिख दिया है

तिजारत आशकी मेँ करते करते
खसारे को मजानि लिख दिया है

जनाब ए हज़रत ए साकिब ने यूँही
जवानी को दीवानी लिख दिया है ।


डॉ साकिब हारूनी (काठमाडौँ)
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