• २०७९ असोज १७ सोमबार

डायरी

सीमा पटेल

सीमा पटेल

कभी सूखे फूल
कभी तितली
तो कभी मोरपंखी
और कभी कागज की
छोटी- छोटी मुड़ी हुई चिटें
मिलेंगी तुम्हें मेरी डायरी में
यही तो होंगी मेरी ऋचाएं
सिर्फ तुम्हारे लिए

सहज कर रख लेना
अक्सर याद आऊंगी
भुला न पाओगे कभी  !!

होंगी डायरी के पन्नो में
कुछ कविताये
तुम्हारे दिए हुए नेह की
भीनी खूशबू में लिपटी
और तुम्हारे मनुहार में लिखी गयी
अनगिनत कविताएं भी
सिर्फ तुम्हारे लिए !!

उस में और भी अनेक
वेदना- संवेदना में डूबी
टूटी थकी कलम से
कुछ प्रेम पातियाँ भी मिलेंगी
हो सकता है कुछ शब्द
आज भी गीले हों
प्रेमविरह से
उनको भी पढ़ लेना
जो सिर्फ तुम्हारे लिए….

पढ़ लेना मेरे जीवन के
हर संवेग को
जो अनपढा अनगढा रह गया था
तुम्हारी अन्य व्यस्तताओं के कारण

और फिर तुम भी लिख देना
कोरे बचे पन्नों पर
अपने सोए हुए शब्दों की
अनुभूति
मेरी डायरी में !

(हिन्दी साहित्य मे स्नातकोत्तर पटेल हिन्दी की चर्चित कवयित्री हैँ ।)
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