• २०७९ असोज १९ बुधबार

जब हमनीं के दीया बारल जाला

परिचय दास

परिचय दास

जब हमनीं के एक दीया  बारल जाला  त अनिवार्यत: एगो  छहियों  उपस्थित होले । ई  प्रकृति के साखी ह । ई  संग-नि:संग  होखल हवे । अपनहीं अंतर्द्वंद्व । अपन  अस्मिता में आत्मस्थ होखले  क जतन ! रोशनी स्मृति आ आशा क मिलल-जुलल हमनीं के आतंरिक मुक्ति ह । एगो अगम पथ पर श्रद्धा, विस्मय ,मुग्धता क ज्योति से यात्रा कइल । दीया क रोशनी आतंरिक भाषा क बोधगम्यता, स्वच्छता, ऋजुता, सगरो अतिशय क  निषिद्धता, जीवन के उत्फुल्ल  व्याकरन के गतिशीलता क सृजन ह । ई रूपरीति आ विषयवस्तु के समन्वयन जइसन हवे । ज्ञान, धन-दौलत आ हिंसा के नकारात्मक अतिरेक जीवन के अन्धकार से भर देला । अन्हियार  में समकालीन  मानस क अन्तर्द्वन्द्व, दोहरापन आ गोड़े के नीचे के भुईं क अनुपलब्धता  क आभास  होला । अतीत पर गर्व क अर्थ अतीत के भार से समाधिस्थ होखल ना । समय  के विस्फोट से नष्ट हो गइलो  रोशनी से विमुखता ह । स्वस्ति-वाचन  से आरम्भ कsके बनहल-बन्हायल नियमन से टूटन कइल ज्योति -पुंज होखल हवे । अन्हियार बतावेला  कि दुनिया के संशोधन क ज़रूरत सदा बनल रही । भाषा से रोशनी आवेले आ मौनो से, बस ओम्में सच्चापन होखे ! नि:शब्दितो हमनीं के आंतरिक प्रकाश देले । रोशनी-अन्हियार क द्वंद्व  आ समन्वयन:  बोधगम्यता, अर्थपूर्णता, जटिलता  आ अर्थहीनता  क असम्बद्ध संसार ह । मनई  जब बन्हल  पुतला में बदल जाला, जीवन तब एगो अनिवार्य नियति ताड़ित निष्ठुरता बन जाले । उहँवें ओके रोशनी चाहीं । जइसे अर्थविहीन शब्द खाली ध्वनि होलें, उन्हनीं के बाति ना कहल जा सकल जाला, वइसहीं जीवन में रंग होखे जे चाहीं, जवन रोशनी ले आवेले । एसे शब्द के ओकर अर्थ फेरू से मिलेला, व्याकरन लौटेला, तार्किकता आवेले, यह मनुष्य क उत्कट संभावना हवे  !  हमनीं के   प्रकाश के प्यार कइल जाला  जवन  रस्ता देखावेला,  अन्हियार के दखल कइल जाला जवन सितारा देखावेला । ढेर रोशनी दीठ के अस्पष्ट क सकले  जबकि अन्हियार में सच्चाई हो सकेले । प्रकाश के चमक से विचलित ना होखे के चाहीं  जवन अन्हियार  में मौजूद गहन वास्तविकता के छुपा लेला । बहरी वस्तु बहरी वास्तविकता क प्रतिनिधित्व करेली सन  जवन  अन्हियार में मौजूद गहन सत्य के स्पष्ट  ना  करेलीं । अन्हियार आ रोशनी । नकारात्मकता आ सकारात्मकता । एम्में से कवनहूं आंतरिक रूप से खराब चाहे अच्छा ना हवे । जवने तरह एक नकारात्मक आ सकारात्मक चार्ज के बिना बिजुरी क अस्तित्व ना ह, एह ब्रह्मांड में जीवन के अनुभव के साथे जुड़े  खातिर अन्हियार आ प्रकाश दूनों आवश्यक हवें ।

आजो खाली  प्रकाशे  होत त हमरा लगेला  कि जीवन आ अस्तित्व अनंत ऊब नीयन होइहें । विविधता  होखला के साथे हमनीं  में एगो दिव्य अस्तित्व  होला । आजो  सगरो लोग अन्हियरवे में होइहें  त कुछऊ देख आ अनुभव  ना कs सकेलें । दुनिया में सगरो अन्हियार  दिया के प्रकाश के नष्ट ना कs  सकेलें  ।  हमनीं के  प्रकाश आ अन्हियार  दनहुने क आवश्यकता हवे । जइसे  कि कवनहूं  नीक फोटोग्राफर आपके बताई कि सौंदर्य  प्रकाश आ छाया क संतुलन  ह जवन   जीवन के सुग्घर  आ रहस्य से सम्पृक्त  बनावेला । ई प्रकाश, अन्हियार आ रंगन आ परिवर्तनन क  अनंत इंद्रधनुष हवे  जवन जीवन के समृद्धि प्रदान करेला ।  जीवन  सामंजस्यपूर्ण  आ आनंदमय होला जब हमनीं के  प्रकाश आ अन्हियार दनहुन  क स्वागत कइल जाला  आ दुनहुन  के बीच एगो सामंजस्यपूर्ण संतुलन पावल जाला । ई मध्य मार्ग  हो सकेला  जवन  बौद्ध धर्म क  जरूरी हिस्सा हवे । अइसन हो सकेला   कि जब हमनीं के  प्रकाश आ अन्हियार के बीच में नृत्य कइल सीखीं त हमनीं के ढेर मज़ा आवे । याद रखीं कि अन्हियार आ प्रकाश के ध्रुवन के बीच आकर्षक रंगन क एगो अनंत इंद्रधनुष हवे। कुरूपता के कारने सौंदर्य के देखल जाला । महानतो में  कमी हो सकेले, लघुतो  में  श्रेष्ठता । शून्यता आ परिपूर्णता एक दूसरे से पैदा होली सन । कठिनाई  आ आसानी से एक दूसरे के संयुक्त कsके जीवन बनावल जाला । लमहर आ छोट एक दूसरे के जोड़ल जाला । उच्च आ निम्न एक दूसरे के परिपूर्ण करेलन । ध्वनि आ श्रवन  एक दूसरे के पूरक हवें । समाज के अग्रभाग आ पश्चभाग एक दूसरे क अनुसरण करेलँ  सन ।

कहल जाला-बदरवन के  चाँह  में सूरज  लुका ना  सकेता । जइसे चंद्रमा समुद्री ज्वार के रोक ना सकेला । एगो छिपल सितारा कब्बों । मुस्किया सकेला । रात के अन्हियार  पर करिया जादू नियन  असर होला । एह से अपना भित्तर के संवाद के सुशोभित करीं । आपन आंतरिक दुनिया के प्रकाश आ करुना से  सुवासित  करीं । जीवन सुग्घर होखी । आपके जीवन में कुछ सबसे सुंदर चीज कटवन के मुकुट में लपेटल आवेली सन । जइसे  एगो चित्रकार के आपन तस्वीर के फिनिशिंग टच देवे खातिर प्रकाश क आवश्यकता होले, ओइसहीं हर केहू के एगो आंतरिक ज्योति के आवश्यकता होले । अन्हियार अन्हियार अन्हियार के बहराँ  ना भगा सकेला: खाली प्रकाशे अइसन कs सकेला । नफरत नफरत से बहराँ ना निकरि सकेले: खाली प्यारे अइसन कs सकेला । बेला जिनगी में चांदनी रात क महकेले । जहवाँ बहुते अन्हियार  होला,  उहवाँ  तरइन  के कारन प्रकाश के बिंदु उपस्थित होलन  सन । केहू के जीवन के सबसे अन्हियार  छन में एगो मोमबत्ती के रोशन कइल सीखीं । प्रकाश बनीं जवन दुसरा के देखला में मदद करला;  ई उहे  ह  जवन जीवन के सबसे गहिर महत्व देला ।

जब हमनीं के अन्हियार क पता लगावे  खातिर पर्याप्त समर्थ  होखल जाई त हमनीं के आपन प्रकाश क अनंत शक्ति का पता लगा पावल जाई । हरेक दिन अइसन नयका अवसर आवेला, जेसे रउवां प्यार क रोशनी लुटा सकल जाला । दूसरन खतिरो जीवन के देवे के चाहीं । केहू दुसरा के समयमें तनिके प्रकाश ले आवल जाव । आभारी रहल जाव आ प्रत्येक दिन के ज्योतिर्मय होके पुरहर  जीयल जाव । हो सकेला कि आप स्वयं प्रकाशवान न होखीं बाकिर आप प्रकाश के संवाहक हो सकल जाला । प्रतिभा रखे वाला कुछ लोगन के लग्गे एकरा के  धारन  कइला क एगो उल्लेखनीय शक्ति होला ।

रोशनी आ अन्हियार क आकार  शब्द आ अर्थ क सुनिश्चित बंधन ह, मानव सभ्यता क ककहरा ओही नियमानुवर्तिता में ह । रोशनी के फुनगी पर हमनीं के सर्जना क संभावना हईं सन । ई सहज बाकिर संश्लिष्ट प्रक्रिया ह ।अन्हियार के  अन्विति  के  जाने क कोशिश अंतत: रोशनी के भाषा के नया दिगंत के सनातन  तलाश क प्रेरणा दिहल हवे ! इहे दिया-देवारी क हेतु हs ।


(अध्यक्ष, हिंदी अकादमी एवं मैथिली और भोजपुरी अकादमी, नई दिल्ली, भारत)
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