माँ - Aksharang
  • २०७८ असोज १२ मङ्गलबार

माँ

इरा ठाकुर

इरा ठाकुर

अस्पताल के बाहर खड़ी वह औरत बहुत ज्यादा बेचैन थी । उसकी दो सालकी दुधमुँही बच्ची कोविड से जूझ रही थी । हस्पिटल के कमरे में उसके कलेजे के टुकड़े का रो रोकर हाल बेहाल हो रहा था, और वह कुछ भी नहीं कर पा रही थी ।
दो दिन हो चुके थे वह रोज हास्पिटल के बाहर खड़ी रहती । ना खाती ना पीती । बस वहीं से वह अपनी बच्चीको तड़पते हुए देखकर रोया करती ।आजभी सुबह तड़के ही वह हास्पिटल पहुँच गई थी । आज उसे अपने बच्चे के रोने की आवाज सामान्य नहीं लगी । वह बहुत धीमी आवाज में रो रही थी । उसने नर्स से बच्ची के बारे में चिंतित होकर पूछा मेरी बेटी कैसी है मेम ?उसने नर्स से कहा आज तो उसके ठीक से रोने की आवाज भी नहीं आ रही है । ईश्वर के लिए कुछ कीजिये । नर्स ने चिंतित होकर कहा रात दिन रोते – रोते वह थक गई होगी । उसने उस बच्चीकी माँ से कहा कि उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं है । उसे एक बूंद पानी पिलाना भी मुश्किल है । एक तो उसे बहुत तेज बुखार है । ऊपर से रो रोकर वह परेशान हो चुकी है वह । किसी के चुप कराए चुप नहीं होती । उस वक्त वह औरत चुप रही । पर नर्स के वहाँ से हटते ही वह तेजी से अपने बच्चे के कमरे की तरफ भागी । कोई कुछ समझपाता तब तक वह अपने बच्चे के बेड तक पहुँच चुकी थी । बच्चे की हालत कुछ ठीक नहीं थी । अकेलेपन ने उसे और भी ज्यादा बीमार बना दिया था । माँ को देखते ही बच्चीको जैसे नेमत मिलगई । माँ को देखते ही जैसे उसकी जान में जान आ गई । उसने अपनी दोनों बाँहें माँकी तरफ फैलादीं । उस औरत ने आव देखा ना ताव लपक कर उसे अपनी बाहों में लिया और जोर से छाती से भींच लिया । तब तक डाक्टर भी पहुँच गए । डाक्टर उस औरत को कोविड मरीज अपने बच्चे को गोद में लेने से नाराज हो गए । वो नाराजगी से उस औरत को बाहर निकलने कह रहे थे । पर वह अपने बच्चे को बांह में समेटे अलग दुनियाँ में मशगूल थी । बच्ची से वह कह रही थी । जब तक तुम ठीक नहीं हो जाती हम दोनों साथ रहेंगे ।अब तुम बिल्कुल भी रोना नहीं । वह माँ मृत्यु के भयको नकार चुकी थी । उसने डाक्टर से कहा । इसे कुछ हो गया तो मैं जीकर क्या करूँगी ? और जब ये इस तरह खाएगी पीयेगी नहीं तो यह कोरोना से तो बाद में मरेगी डर और अकेलेपन से पहले ही मर जाएगी । सबने देखा, कुछ क्षण में ही बच्चीमां के आँचल में सिमटकर गहरी नींद में सो गई थी । उसके एक हाथ में माँ के आँचलका एक छोर था और दूसरे हाथका अँगूठा उसके मुँह में । अब उसे दुनियाँकी हर नेमत मिल चुकी थी । डाक्टर के लाख कोशिशों के बाद भी वो औरत अपने बच्चे से अलग नहीं हुई । उसने कहा या तो हमें घर पर ही रहने की इजाजत दीजिये या फिर मैं भी इसके साथ यहीं रहूँगी । क्योंकि मैं अब इसको इस तरह छोड़कर नहीं जाऊँगी ।

(भारत निवासी इरा ठाकुर चर्चित साहित्कार हैं ।)
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