जिन्दगी - Aksharang
  • २०७७ फागुन १७ सोमबार

जिन्दगी

ध्रुव जोशी

ध्रुव जोशी

जीवन हयात-ए-फानी है
जवानी दरिया-ए-रवानी है
जिन्दगी और मौत दोनो परेशां
आशिक और रिन्दो की कहानी है ।

लडखडाता है कोई बेखुदी-ए-इश्क में
झुमता है दुसरा आलम-ए-बेखुदी में
फर्क क्या होना है दोनो ही लडखडाए
जब जिन्दगी ही एक नशा है ।

खुद ही समझ जाओगे जिन्दगी क्या चीज है
रश्मे जमाने के नाम रिश्तों के तिजारत छोड दोगे
गगन के चाँद न ढूढो किसी के आँचल में
वह तो कुछ लम्हे का उजाला है
अपने आँगन के चाँद को सँवारोगे तुम
पूरी कायनात उजाला हो जाता है ।

मुसाफिर है हम सब जिन्दगी के सफर के
किसी मोड पर फिर मिलते मिलाते रहेंगे
कोई जल्दी में सफर तय कर जाता है, मेरे दोस्त
कोई देर से जानेवाला होता है ।

जिन्दगी के फना को समझ गए गर तुम
कोई रूहअफजा नहीं होता कहीं
जिन्दगी के नशे को शिद्दत से जिओ
खुशियों से कभी महरूम न रहोगे तुम।


(जोशी चर्चित कवि हैं ।)
joshy.dhruva@gmail.com