हमरो किछ सिखऽ बुझऽ दे न - Aksharang
  • २०७७ असार २४ बुधबार

हमरो किछ सिखऽ बुझऽ दे न

कंचना झा

कंचना झा

कहिदहिन सभके माई
नइ कहथिन जे हम बेटी छी
कहि दहुन पित्ति पितियैनके
नइ कहथिन जे हमरा सहै पडत
एकटा बात कहऽ तऽ
सभ दिन हमहीं कियाक सहबै ?
खाली अहि दुआरे जे तोरा कोखि सँ
बेटी भऽ जन्मलियौ
गैं हमरो किछ सिखऽ बुझऽ दे न
सदैरखन याह क्यिाक सिखबैत छैं जे
सह, चुप रह
कहि अहि दुआरे तऽ नइ जे
तु एना केने छे ?
सहि आ चुप भऽतु तऽ महान बनलै
तोरा ओ अप्पन महानता आ त्याग बुझाइत छौ
मुदा हमरा नइ
तु सहि लेले महान बनि गेले
हमरा सँ आब नइ हेतौ
हमरा महान, त्यागक मूत्र्ति नइ बनबाक अछि
हमरा मान मर्यादामे नइ बान्ह
हमरा अप्पन रस्ता लेबै दे
हमरा अप्पना लेल जीबै दे
हमरा पंख दे जे हम खुलल आकाशमे उडि सकि
कहिदहुन बाबा बाके जँ हमरा संग देताह
हम कहियो माथक पगडी नइ झुकेबै ,
महान नइ माइ शान बनबै ।
kanchanajha1978@gmail.com